32 वर्षों की गौरवपूर्ण प्रशासनिक सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए आईएएस डॉ. दिनेश चंद्र, शीर्षासन कर दिया ऊर्जा, अनुशासन और स्वस्थ जीवन का संदेश

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32 वर्षों की गौरवपूर्ण प्रशासनिक सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए आईएएस डॉ. दिनेश चंद्र, शीर्षासन कर दिया ऊर्जा, अनुशासन और स्वस्थ जीवन का संदेश

रिपोर्टर दीपक शुक्ला

लखनऊ, 30 जून 2026 । उत्तर प्रदेश शासन के लोक निर्माण विभाग में विशेष सचिव के पद पर कार्यरत आईएएस डॉ. दिनेश चंद्र ने मंगलवार को 32 वर्षों की गौरवपूर्ण प्रशासनिक सेवा पूर्ण कर सेवानिवृत्ति ग्रहण की। अपने अंतिम कार्यदिवस पर उन्होंने भावनात्मक संदेश जारी करते हुए भगवान श्री गणेश, भगवान शिव और श्री हनुमान जी का स्मरण किया तथा जीवनभर मिली शक्ति, मार्गदर्शन और जनसेवा का अवसर प्रदान करने के लिए ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
डॉ. दिनेश चंद्र ने कहा कि श्री हनुमान जी की कृपा से उन्होंने पूरे प्रशासनिक जीवन में ऊर्जा, निष्ठा और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन किया। उन्होंने विश्वास जताया कि सेवानिवृत्ति के बाद भी नई संभावनाओं के माध्यम से समाज और राष्ट्र की सेवा का उनका संकल्प निरंतर जारी रहेगा।
उन्होंने अपने माता-पिता, गुरुजनों, परिजनों, धर्मपत्नी, पुत्र-पुत्रियों, सहयोगियों तथा सभी शुभचिंतकों के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार और विशेष रूप से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कार्य करने का अवसर मिलने पर कृतज्ञता जताई। उन्होंने कानपुर देहात, बहराइच, सहारनपुर और जौनपुर सहित विभिन्न जनपदों में निभाई गई जिम्मेदारियों को अपने प्रशासनिक जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धियां बताया।
शीर्षासन कर दिया फिटनेस और आत्मअनुशासन का संदेश
सेवानिवृत्ति के अवसर पर डॉ. दिनेश चंद्र ने शीर्षासन करते हुए एक वीडियो भी साझा किया, जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि योग, अनुशासित जीवनशैली और सकारात्मक सोच व्यक्ति को जीवन के हर पड़ाव पर स्वस्थ, सक्रिय और ऊर्जावान बनाए रखती है। शीर्षासन के माध्यम से उन्होंने समाज को स्वास्थ्य, आत्मअनुशासन और निरंतर सक्रिय रहने का प्रेरक संदेश दिया।
सेवा, समर्पण और प्रेरणा की मिसाल
डॉ. दिनेश चंद्र की सेवानिवृत्ति केवल एक प्रशासनिक यात्रा का समापन नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण, अनुशासन और सकारात्मक जीवन-दृष्टि की प्रेरक मिसाल है। उनका संदेश बताता है कि कर्तव्यनिष्ठा, योग और आत्मअनुशासन के बल पर जीवन के प्रत्येक चरण को सार्थक बनाया जा सकता है। सेवानिवृत्ति के बाद भी समाज के प्रति उनकी सक्रिय सोच और सकारात्मक दृष्टिकोण अनेक लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।

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