जानसठ तहसील की पुरानी स्मृतियों ने दी नई ऊर्जा, बार संघ ने पूर्व आईएएस डॉ. दिनेश चंद्र का किया सम्मान
रिपोर्टर : दीपक शुक्ला
मुजफ्फरनगर। 18 अगस्त 2026 को अपने गृह जनपद बिजनौर के लिए मेरठ से प्रस्थान करते हुए पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र अचानक तहसील जानसठ पहुंचे। वर्ष 2004 में मुजफ्फरनगर की तत्कालीन सबसे बड़ी तहसील जानसठ में उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के रूप में करीब सवा वर्ष तक तैनात रहे डॉ. दिनेश चंद्र के लिए यह दौरा पुरानी स्मृतियों को ताजा करने वाला रहा। तहसील पहुंचते ही उन्हें अपने कार्यकाल की यादें फिर से जीवंत हो उठीं और उन्होंने इसे नई ऊर्जा व कार्य करने की प्रेरणा देने वाला अनुभव बताया।

डॉ. दिनेश चंद्र ने बताया कि उस समय जानसठ तहसील काफी विस्तृत थी, जो अब विभाजित होकर जानसठ और खतौली तहसील के रूप में अस्तित्व में है। क्षेत्र के किसान मेहनती हैं और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाते हुए गन्ने की खेती को प्रमुखता देते हैं। उस समय एक ही तहसील क्षेत्र में खतौली, मंसूरपुर, मोरना, टिकोला और मोहिउद्दीनपुर सहित पांच चीनी मिलें थीं। गन्ना भुगतान को लेकर किसानों को समय-समय पर समस्याओं का सामना करना पड़ता था। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान अधिकारियों, किसानों और संबंधित पक्षों के समन्वय से समस्याओं के समाधान के प्रयासों को याद किया।
तहसील स्थित बार भवन पहुंचने पर अधिवक्ताओं और स्थानीय लोगों ने पूर्व आईएएस अधिकारी का आत्मीय स्वागत एवं सम्मान किया। वर्षों बाद उसी स्थान पर पहुंचकर डॉ. दिनेश चंद्र ने अपने कार्यकाल की पुरानी यादें साझा कीं। उन्होंने कहा कि उस समय बार और बेंच के बीच बेहतर समन्वय था, जिसका सकारात्मक परिणाम वादकारियों को न्याय दिलाने में मिलता था। उन्होंने न्याय व्यवस्था में अधिवक्ताओं के योगदान की भी सराहना की।
इस अवसर पर बार संघ के अध्यक्ष प्रमोद शर्मा, दीपेश गुप्ता, पंत, अचल गर्ग, प्रद्युम्न भेटवाल, कम्बोज, शशि सैनी, हैदर जैदी सहित अन्य अधिवक्ताओं ने डॉ. दिनेश चंद्र का सम्मान एवं अभिनंदन किया।
डॉ. दिनेश चंद्र ने बार संघ के अधिवक्ताओं और उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों बाद भी लोगों का वही स्नेह और सम्मान मिलना उनके लिए सुखद एवं भावुक अनुभव है। उन्होंने कहा कि अच्छे कार्यों की स्मृतियां समय बीतने के बाद भी लोगों के दिलों में बनी रहती हैं और यही किसी सार्वजनिक सेवक के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है।














