‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के संदेश को जीवन में उतारने वाले हैं पूर्व आईएएस डॉ. दिनेश चंद्र
रिपोर्टर : दीपक शुक्ला
सहारनपुर, उत्तर प्रदेश। पूर्व आईएएस एवं निवर्तमान जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र के व्यक्तित्व और सेवाकाल से जुड़े संस्मरणों में प्रशासनिक दायित्वों के साथ मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक समरसता की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। उनका जीवन ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के संदेश को आत्मसात करते हुए समाज में सद्भाव, समानता और मानवता को बढ़ावा देने की प्रेरणा देता है।

सहारनपुर में प्रशासनिक सेवा के दौरान सुरक्षाकर्मियों, कर्मचारियों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ उनके आत्मीय संबंध आज भी कायम हैं। सेवानिवृत्ति के बाद भी पुराने सहयोगियों और उनके परिवारों से उनका जुड़ाव इस बात का प्रमाण है कि उन्होंने प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ मानवीय रिश्तों को भी महत्व दिया।
इस अवसर पर जनपद सहारनपुर के वरिष्ठ समाजसेवी हरिओम सिंह उर्फ रिंकू राणा तथा उनके परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। डॉ. दिनेश चंद्र ने सेवाकाल के दौरान सहयोग देने वाले कर्मियों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ बिताए अनुभवों को साझा किया।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने श्रीरामचरितमानस, गोस्वामी तुलसीदास, संत कबीरदास, संत शिरोमणि रविदास और गुरु गोरखनाथ की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए समाज में सद्भाव, सेवा और मानव कल्याण की भावना को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने वाल्मीकि रामायण और श्रीरामचरितमानस के आदर्शों से मिलने वाली प्रेरणा को भी रेखांकित किया।
डॉ. दिनेश चंद्र ने स्वच्छता, जनहित और नागरिक सहभागिता को समाज के विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया। उनका कहना है कि किसी शहर या समाज का विकास केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है, बल्कि आम नागरिकों की सक्रिय सहभागिता और आपसी सहयोग भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि अधिकारी और कर्मचारी के बीच संबंध केवल पद और दायित्व तक सीमित नहीं होने चाहिए। उनमें विश्वास, सम्मान और मानवीय संवेदना का होना जरूरी है। यही भावना सेवानिवृत्ति के बाद भी पुराने सहयोगियों और उनके परिवारों के साथ रिश्तों को मजबूती प्रदान करती है।
समाजसेवी हरिओम सिंह उर्फ रिंकू राणा और उनके परिवार के साथ डॉ. दिनेश चंद्र की आत्मीयता सामाजिक समरसता और आपसी सम्मान की भावना को दर्शाती है। संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा दिए गए समानता, सामाजिक न्याय और बंधुत्व के संदेश को भी उन्होंने समाज के लिए महत्वपूर्ण बताया।
डॉ. दिनेश चंद्र का मानना है कि राष्ट्र निर्माण के लिए प्रशासनिक व्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी, स्वच्छता, जनसेवा और मानवीय रिश्तों को मजबूत करना आवश्यक है। ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ का संदेश केवल एक आदर्श वाक्य नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और मानवता को मजबूत करने का मार्ग है।














