8 महीने की गर्भवती और 14 लीटर दूध देने वाली बताकर बेची गाय, निकली फर्जी; किसान ने जीता उपभोक्ता फोरम का केस
शामली/राजस्थान। उत्तर प्रदेश के शामली जनपद के एक किसान के साथ पशु खरीद के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। किसान ने राजस्थान के एक पशु विक्रेता से 45 हजार रुपये में गाय खरीदी थी। विक्रेता ने दावा किया था कि गाय 8 महीने की गर्भवती है और प्रतिदिन 14 किलो दूध देती है। लेकिन खरीद के दो महीने बाद भी गाय ने बछड़े को जन्म नहीं दिया, जिससे किसान को संदेह हुआ। जांच और बातचीत के बाद जब सच्चाई सामने आई तो किसान ने न्याय की लड़ाई शुरू की और आखिरकार उपभोक्ता फोरम से उसे राहत मिली।
जानकारी के अनुसार किसान ने सोशल मीडिया और यूट्यूब के माध्यम से पशु विक्रेता से संपर्क किया था। गाय की खूबियां बताते हुए उसे भरोसा दिलाया गया कि पशु पूरी तरह स्वस्थ और उच्च नस्ल का है। किसान ने विश्वास कर गाय खरीद ली और उसे अपने गांव ले आया।
कुछ समय बाद किसान को महसूस हुआ कि गाय न तो बताए गए अनुसार दूध दे रही है और न ही गर्भवती होने के कोई स्पष्ट संकेत दिखाई दे रहे हैं। दो महीने बीत जाने के बाद भी जब गाय ने बच्चे को जन्म नहीं दिया तो किसान ने पशु चिकित्सकों से जांच कराई। जांच में पता चला कि गाय गर्भवती ही नहीं थी। इसके बाद किसान ने पशु विक्रेता से संपर्क किया, लेकिन उसने जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया।
किसान का आरोप है कि गाय बेचने में एक यूट्यूबर ने भी अहम भूमिका निभाई थी। यूट्यूबर ने अपने चैनल पर गाय की विशेषताओं का प्रचार-प्रसार किया और किसान को खरीदने के लिए प्रेरित किया। जब विवाद बढ़ा तो दोनों पक्षों ने मामले से पल्ला झाड़ लिया।
ठगा महसूस करने के बाद किसान ने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान किसान ने खरीद से जुड़े दस्तावेज, वीडियो, बातचीत और चिकित्सकीय रिपोर्ट प्रस्तुत की। फोरम ने मामले को गंभीर मानते हुए पशु विक्रेता और संबंधित यूट्यूबर को दोषी माना।
फैसले में उपभोक्ता फोरम ने दोनों पर कुल 2.25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। साथ ही किसान को आर्थिक और मानसिक क्षति के लिए मुआवजा देने का आदेश भी दिया गया। इस फैसले को पशु खरीद-बिक्री में फर्जी दावों और सोशल मीडिया के जरिए भ्रम फैलाने वालों के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पशु खरीदते समय केवल ऑनलाइन वीडियो या प्रचार पर भरोसा न करें। खरीद से पहले पशु की चिकित्सकीय जांच और दस्तावेजों की पुष्टि अवश्य कर लेनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की धोखाधड़ी से बचा जा सके।












