186 वर्ष पुरानी परंपरा का गवाह बना शाहगंज का सीता श्रृंगार मेला, चूड़ी मोहल्ले में सजीं दुकानें

0
44

186 वर्ष पुरानी परंपरा का गवाह बना शाहगंज का सीता श्रृंगार मेला, चूड़ी मोहल्ले में सजीं दुकानें

पुरुषों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित, महिलाओं के लिए ही खुलता है मेले का द्वार; पारंपरिक आयोजन में उमड़ रही महिलाओं की भीड़

जौनपुर। जनपद के शाहगंज कस्बे में 186 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपरा एक बार फिर जीवंत हो उठी है। नगर के चूड़ी मोहल्ले में लगने वाला प्रसिद्ध सीता श्रृंगार मेला (चूड़ी मेला) शुरू हो गया है। मेले को लेकर क्षेत्र में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। चूड़ी मोहल्ले की गलियां रंग-बिरंगी चूड़ियों, श्रृंगार प्रसाधनों और महिलाओं की जरूरत से जुड़े विभिन्न सामानों की दुकानों से सज गई हैं। सप्ताह भर तक चलने वाला यह मेला 18 अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा।

इस मेले की सबसे खास और अनूठी विशेषता इसकी परंपरा और नियम हैं। यहां पुरुषों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहता है, जबकि महिलाओं को ही मेले में आने की अनुमति दी जाती है। यही वजह है कि सीता श्रृंगार मेला अपनी अलग पहचान रखता है। मेले में महिलाएं अपनी पसंद की रंग-बिरंगी चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर, सौंदर्य प्रसाधन और अन्य श्रृंगार सामग्री की खरीदारी करती हैं। दुकानों पर सजी आकर्षक चूड़ियां और श्रृंगार के सामान मेले की रौनक बढ़ा रहे हैं।

रामनगर की रामलीला की तर्ज पर हुई थी शुरुआत

श्री रामलीला समिति की ओर से आयोजित इस मेले के इतिहास को लेकर समिति के प्रमुख इंदुनाथ पांडेय उर्फ बैजू महाराज ने बताया कि करीब 186 वर्ष पूर्व उनके परदादा स्वर्गीय पंडित अनंतराम ने रामनगर की रामलीला की तर्ज पर शाहगंज में रामलीला और चूड़ी मेले की शुरुआत की थी। उस समय शुरू हुई यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती रही और आज भी उसी सांस्कृतिक विरासत के रूप में कायम है।

महिलाओं के लिए खास है यह आयोजन

सीता श्रृंगार मेले का उद्देश्य केवल खरीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के लिए एक विशेष सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजन भी है। मेले में महिलाएं समूह में पहुंचती हैं और खरीदारी के साथ आपस में मेल-मिलाप भी करती हैं। चूड़ी मोहल्ले की संकरी गलियों में सजी दुकानें और महिलाओं की चहल-पहल इस आयोजन को खास बना देती है।

186 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा शाहगंज की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। आधुनिकता के दौर में भी इस ऐतिहासिक मेले का निरंतर आयोजन स्थानीय लोगों के लिए गौरव का विषय है। सीता श्रृंगार मेला आज भी अपनी विशिष्ट परंपरा, धार्मिक मान्यता और महिलाओं के लिए निर्धारित विशेष व्यवस्था के चलते लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here