जौनपुर में ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव और 2 एडीओ पर मुकदमा दर्ज, केयरटेकर के मानदेय विवाद में न्यायालय का आदेश

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जौनपुर। जिले के सुरेरी थाना क्षेत्र की ग्राम सभा नोनरा में सामुदायिक शौचालय की केयरटेकर के मानदेय भुगतान से जुड़ा मामला अब कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया है। महिला की शिकायत पर न्यायालय के आदेश के बाद ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव और दो सहायक विकास अधिकारियों (एडीओ) समेत पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता ने मानदेय नहीं मिलने, जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि अभी न्यायिक रूप से नहीं हुई है।

वर्ष 2021 से काम करने और मानदेय नहीं मिलने का आरोप

एफआईआर में दर्ज विवरण के अनुसार, ग्राम नोनरा निवासी बिंदु देवी पत्नी राजबहादुर ने दावा किया है कि वर्ष 2021 में रोशनी महिला स्वयं सहायता केंद्र के माध्यम से स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत उनकी नियुक्ति सामुदायिक शौचालय में केयरटेकर के पद पर हुई थी।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, उन्हें प्रतिमाह छह हजार रुपये मानदेय और साफ-सफाई की सामग्री खरीदने के लिए तीन हजार रुपये देने की बात कही गई थी। महिला का आरोप है कि उन्होंने अपने स्तर से साफ-सफाई की सामग्री खरीदकर काम किया, लेकिन उन्हें मानदेय का भुगतान नहीं किया गया।

बीडीओ, डीपीआरओ और जिलाधिकारी से शिकायत का उल्लेख

महिला ने अपनी शिकायत में बताया कि भुगतान और नियुक्ति से संबंधित समस्या को लेकर उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिए। दस्तावेज में छह अक्टूबर 2025 को बीडीओ और जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ), जौनपुर से शिकायत करने तथा 19 जुलाई 2025 और दो दिसंबर 2025 को अधिकारियों के समक्ष प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने का उल्लेख है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने नियुक्ति पत्र की जांच कराने और बकाया मानदेय दिलाने की मांग भी की।

17 जून 2025 की घटना को लेकर गंभीर आरोप

एफआईआर के अनुसार, 17 जून 2025 को मानदेय और अन्य समस्याओं को लेकर विवाद हुआ। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ग्राम प्रधान के घर जाकर अपनी बात रखने के दौरान उनके साथ गाली-गलौज की गई और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। महिला ने जान से मारने की धमकी दिए जाने का आरोप भी लगाया है।

शिकायत में ग्राम प्रधान बदामा देवी, उनके पति सुभाषचंद्र, ग्राम सचिव राजकुमार उर्फ राजन और अन्य संबंधित अधिकारियों के नाम शामिल हैं। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष और पुलिस विवेचना के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।

न्यायालय के आदेश पर सुरेरी थाने में एफआईआर

उपलब्ध प्राथमिकी के अनुसार, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्वेता यादव, जौनपुर की अदालत के 19 मार्च 2026 के आदेश के क्रम में सुरेरी पुलिस को मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने का निर्देश दिया गया। इसके बाद 24 अक्टूबर 2026 को थाना सुरेरी में एफआईआर संख्या 0154/2026 दर्ज की गई।

इन पांच लोगों के नाम प्राथमिकी में शामिल

एफआईआर में निम्नलिखित पांच व्यक्तियों का उल्लेख है:

  1. राजकुमार उर्फ राजन — ग्राम सचिव, ग्राम सभा नोनरा।
  2. एडीओ पंचायत — विकास खंड रामपुर, नाम प्राथमिकी में अज्ञात।
  3. एडीओ आईएसबी — विकास खंड रामपुर, नाम प्राथमिकी में अज्ञात।
  4. बदामा देवी — ग्राम प्रधान, ग्राम सभा नोनरा।
  5. सुभाषचंद्र — ग्राम प्रधान बदामा देवी के पति, शिकायत में प्रधानपति के रूप में उल्लेखित।

दोनों एडीओ के नाम उपलब्ध एफआईआर में अज्ञात दर्ज हैं। इसलिए उनके नाम की आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी व्यक्ति विशेष का नाम प्रकाशित करना उचित नहीं होगा।

भारतीय न्याय संहिता की छह धाराओं का उल्लेख

प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की निम्न धाराएं दर्ज हैं:

  • धारा 318(4): धोखाधड़ी करके बेईमानी से संपत्ति या धन प्राप्त कराने से संबंधित प्रावधान।
  • धारा 319(2): प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी से संबंधित प्रावधान।
  • धारा 316(2): आपराधिक न्यासभंग से संबंधित प्रावधान।
  • धारा 316(5): लोक सेवक या निर्धारित विशेष क्षमता में कार्यरत व्यक्ति द्वारा आपराधिक न्यासभंग से संबंधित प्रावधान।
  • धारा 351(3): गंभीर प्रकृति की आपराधिक धमकी से संबंधित प्रावधान।
  • धारा 352: शांति भंग कराने के इरादे से जानबूझकर अपमान करने से संबंधित प्रावधान।

इसके अतिरिक्त, प्राथमिकी में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(r) और 3(1)(s) का भी उल्लेख है। इन प्रावधानों का लागू होना घटना के तथ्यों और विवेचना में सामने आने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगा।

ग्राम प्रधान ने आरोपों को बताया गलत

25 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, ग्राम प्रधान बदामा देवी ने आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि सामुदायिक शौचालय वित्तीय वर्ष 2023-24 में बनकर तैयार हुआ था और वर्ष 2021 से नियुक्ति किए जाने संबंधी आरोप सही नहीं हैं।

इस प्रकार शिकायतकर्ता और ग्राम प्रधान के कथनों में अंतर है। नियुक्ति पत्र, भुगतान संबंधी अभिलेख, विभागीय आदेश और अन्य साक्ष्यों की जांच से ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

पुलिस विवेचना के बाद स्पष्ट होगी स्थिति

न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज होने के बाद अब पुलिस विवेचना महत्वपूर्ण है। जांच में केयरटेकर की नियुक्ति, मानदेय भुगतान, सफाई सामग्री की खरीद, संबंधित विभागीय रिकॉर्ड और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की पड़ताल की जा सकती है।

महत्वपूर्ण: प्राथमिकी दर्ज होने का अर्थ आरोप सिद्ध होना नहीं है। मामले में सभी संबंधित पक्षों का पक्ष और विवेचना के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

स्रोत: थाना सुरेरी, जौनपुर की एफआईआर संख्या 0154/2026 की उपलब्ध प्रति तथा 25 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित हिन्दुस्तान की रिपोर्ट।

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