“कागजों में बदल गया मकान का मालिक”, मड़ियाहूं तहसील में घरौनी खेल उजागर

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“कागजों में बदल गया मकान का मालिक”, मड़ियाहूं तहसील में घरौनी खेल उजागर

संपूर्ण समाधान दिवस में किसान ने खोली पोल, दस्तावेज देखकर अफसर भी रह गए हैरान

जौनपुर। मड़ियाहूं तहसील में कथित घरौनी घोटाले का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने राजस्व विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव में वर्षों से बने पक्के मकान को कागजों में दूसरे व्यक्ति के नाम दर्ज किए जाने का आरोप लगाते हुए किसान ने शनिवार को संपूर्ण समाधान दिवस में गुहार लगाई। दस्तावेज और मकान की तस्वीरें देखकर अधिकारियों के भी होश उड़ गए। मामला सामने आते ही तहसील परिसर में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया।

मामला मड़ियाहूं तहसील क्षेत्र के रामपुर थाना अंतर्गत राघव राम पट्टी माफी गांव का है। गांव निवासी बच्चन मिश्रा पुत्र स्वर्गीय रमाशंकर मिश्रा ने आरोप लगाया कि वह अपने भाइयों आसाराम मिश्रा, राजेंद्र प्रसाद मिश्रा, कृष्ण कुमार मिश्रा और पंचदेव मिश्रा के साथ वर्षों से आबादी की जमीन पर बने पक्के मकान में निवास कर रहे हैं। इसके बावजूद राजस्व अभिलेखों में उनकी आबादी और मकान को दूसरे व्यक्ति के नाम दर्ज कर घरौनी जारी कर दी गई।

पीड़ित किसान के अनुसार पूर्व में गांव में तैनात रहे लेखपाल मनोज यादव और बाद में संबंधित हल्का लेखपालों की मिलीभगत से यह पूरा खेल किया गया। आरोप है कि गांव निवासी मक्खन यादव पुत्र दूखरन यादव के नाम आराजी नंबर 54, रकबा 0.045 हेक्टेयर में करीब 365.160 वर्ग मीटर भूमि की घरौनी बना दी गई, जबकि उस स्थान पर मिश्रा परिवार का वर्षों पुराना पक्का मकान बना हुआ है।

धमकी मिलने पर खुला मामला

किसान बच्चन मिश्रा का कहना है कि उन्हें इस फर्जीवाड़े की जानकारी तब हुई जब शुक्रवार को मक्खन यादव कथित घरौनी के कागजात लेकर उनके घर पहुंचे और मकान अपना बताते हुए गिरवाने की धमकी देने लगे। यह सुनकर परिवार के होश उड़ गए। अगले ही दिन पीड़ित परिवार खतौनी, घरौनी की प्रति और मकान की तस्वीरें लेकर संपूर्ण समाधान दिवस पहुंचा।

दस्तावेज देखकर अधिकारी भी रह गए हैरान

शनिवार को तहसील सभागार में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में जैसे ही पीड़ित किसान ने अपनी शिकायत प्रभारी उपजिलाधिकारी नवीन कुमार के सामने रखी, वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए। सूत्रों के अनुसार दस्तावेज और मकान की तस्वीरें देखने के बाद एसडीएम ने तत्काल शिकायत तहसीलदार राकेश कुमार को सौंपते हुए मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए।

बताया जाता है कि तहसीलदार ने मौके पर ही वर्तमान लेखपाल विपिन यादव को फोन कर पूछा कि आखिर किसी व्यक्ति की आबादी में दूसरे व्यक्ति की घरौनी कैसे दर्ज हो गई। हालांकि बातचीत के दौरान लेखपाल ने क्या जवाब दिया, यह स्पष्ट नहीं हो सका।

“अब हाईकोर्ट तक चप्पल घिसनी पड़ेगी”

पीड़ित किसान ने आरोप लगाया कि तहसील में शिकायतों के बावजूद लेखपालों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की अनदेखी के चलते किसानों को न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। बच्चन मिश्रा ने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो उन्हें हाईकोर्ट तक जाना पड़ेगा।

तहसीलदार ने दिया संशोधन का आश्वासन

फिलहाल तहसीलदार राकेश कुमार ने मामले की जांच कर घरौनी में आवश्यक संशोधन कराने का आश्वासन दिया है। वहीं पूरे मामले के सामने आने के बाद तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर बिना मौके की जांच और सत्यापन के किसी दूसरे व्यक्ति के मकान की घरौनी कैसे तैयार हो गई।

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