यूपी पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट सख्त, 10 जुलाई तक चुनाव कार्यक्रम बताने के निर्देश

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यूपी पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट सख्त, 10 जुलाई तक चुनाव कार्यक्रम बताने के निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने और पंचायत चुनाव टालने के मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार की दलीलों को खारिज कर दिया तथा स्पष्ट निर्देश दिया कि 10 जुलाई तक ओबीसी आयोग की रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए और उसी दिन पंचायत चुनाव की संभावित तिथियों की भी जानकारी दी जाए।

हाईकोर्ट की सख्ती के बाद प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि चुनाव प्रक्रिया में अब और अधिक देरी की गुंजाइश नहीं बची है।

सरकार और आयोग की दलीलें खारिज

बुधवार को लखनऊ खंडपीठ में हुई सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग ने ओबीसी आयोग के गठन और उसकी रिपोर्ट तैयार होने में लगभग छह माह का समय लगने का हवाला देते हुए अदालत से अतिरिक्त समय मांगा। हालांकि अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और कहा कि 10 जुलाई तक हर हाल में रिपोर्ट दाखिल की जाए।

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि रिपोर्ट प्रस्तुत करने के साथ ही यह बताना होगा कि पंचायत चुनाव किस माह और किस तिथि को कराए जाएंगे।

अक्टूबर-नवंबर में हो सकते हैं पंचायत चुनाव

सूत्रों के अनुसार हाईकोर्ट की सख्ती के बाद ओबीसी आयोग ने अपनी प्रक्रिया तेज कर दी है। आयोग के पास सर्वेक्षण और रिपोर्ट तैयार करने के लिए सीमित समय है। यदि 10 जुलाई तक रिपोर्ट प्रस्तुत हो जाती है तो राज्य सरकार को अगले कुछ महीनों के भीतर पंचायत चुनाव कराने की दिशा में कदम उठाने होंगे।

राजनीतिक और प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि पंचायत चुनाव अक्टूबर या नवंबर 2026 में कराए जा सकते हैं। सरकार अदालत के समक्ष इसी अवधि का चुनाव कार्यक्रम प्रस्तुत कर सकती है।

विधानसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है असर

उत्तर प्रदेश विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल मई 2027 तक है। संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार उससे पहले विधानसभा चुनाव कराना आवश्यक होगा। दूसरी ओर, फरवरी से अप्रैल 2027 तक प्रस्तावित जनगणना अभियान में सरकारी मशीनरी का व्यापक उपयोग किया जाएगा।

ऐसी स्थिति में विधानसभा चुनाव फरवरी से पहले कराए जाने की संभावना बढ़ जाती है। यदि पंचायत चुनाव अक्टूबर-नवंबर में होते हैं तो उसके तुरंत बाद विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी तेज हो सकती हैं।

क्या होंगे ताबड़तोड़ चुनाव?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पंचायत चुनाव अक्टूबर-नवंबर में संपन्न होते हैं तो राज्य सरकार और चुनाव आयोग को विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया भी जल्द शुरू करनी पड़ सकती है। दिसंबर से फरवरी के बीच कड़ाके की ठंड, घना कोहरा और प्रचार-प्रसार की व्यावहारिक चुनौतियां चुनाव कार्यक्रम को प्रभावित कर सकती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे में पंचायत चुनाव और विधानसभा चुनाव के बीच का अंतराल कम रह सकता है तथा प्रदेश में लगातार चुनावी गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।

10 जुलाई पर टिकी सबकी नजर

अब प्रदेश की राजनीति, पंचायत प्रतिनिधियों और संभावित प्रत्याशियों की नजर 10 जुलाई की अगली सुनवाई पर टिकी हुई है। इसी दिन यह स्पष्ट होगा कि ओबीसी आरक्षण संबंधी रिपोर्ट किस स्थिति में है और उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की आधिकारिक समय-सीमा क्या होगी।

हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद यह तय माना जा रहा है कि पंचायत चुनाव को लेकर राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को अब स्पष्ट रोडमैप पेश करना होगा।

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