राजस्थान निकाय चुनाव में भाजपा का दबदबा, कांग्रेस को भी कई शहरों में मिली बढ़त

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राजस्थान निकाय चुनाव में भाजपा का दबदबा, कांग्रेस को भी कई शहरों में मिली बढ़त

3,945 वार्डों में भाजपा की जीत, कांग्रेस 3,438 पर; निर्दलीयों ने 2,161 सीटों पर दर्ज की जीत, कई बड़े नगर निगमों में बदला सियासी समीकरण

जयपुर। राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव 2026 के परिणामों ने राज्य की शहरी राजनीति की तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी है। सोमवार को सुबह आठ बजे से शुरू हुई मतगणना के बाद सामने आए परिणामों में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कुल मिलाकर मजबूत प्रदर्शन किया है। उपलब्ध परिणामों के अनुसार भाजपा ने 3,945 वार्डों में जीत दर्ज कर बढ़त बनाई, जबकि कांग्रेस को 3,438 वार्डों में सफलता मिली। निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी 2,161 वार्डों में जीत हासिल कर कई निकायों में बोर्ड गठन का समीकरण अपने हाथ में रखा है।

मतगणना के दौरान शुरुआती चरण से ही भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला दिखाई दिया। दोपहर तक के आधिकारिक आंकड़ों में भी भाजपा कांग्रेस से आगे थी। दोपहर दो बजे तक भाजपा 3,624, कांग्रेस 3,093 और निर्दलीय 2,034 वार्डों में जीत दर्ज कर चुके थे। इसके बाद परिणाम आने के साथ भाजपा की बढ़त और मजबूत हुई।

309 नगरीय निकायों में हुआ चुनाव

राजस्थान में इस बार 309 शहरी स्थानीय निकायों के लिए चुनाव कराए गए। चुनाव दो चरणों में संपन्न हुए। पहले चरण में 9 सितंबर और दूसरे चरण में 11 सितंबर को मतदान हुआ था। राज्य के प्रमुख शहरों जयपुर, जोधपुर, अजमेर, कोटा, उदयपुर, बीकानेर, भीलवाड़ा, अलवर, भरतपुर और पाली समेत अनेक नगर निकायों में भाजपा-कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला।

इन चुनावों में करीब 38,889 उम्मीदवार मैदान में थे और हजारों वार्डों के परिणामों ने स्थानीय स्तर पर नई राजनीतिक तस्वीर तैयार की। चुनाव परिणामों को 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस के संगठनात्मक प्रभाव की परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है।

जयपुर में भाजपा ने बनाई मजबूत बढ़त

राजधानी जयपुर नगर निगम चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन खासा मजबूत रहा। उपलब्ध परिणामों में भाजपा ने कांग्रेस को पीछे छोड़ते हुए बहुमत की स्थिति हासिल की। ताजा अपडेट में जयपुर के घोषित वार्डों में भाजपा की बढ़त लगातार बनी रही। एक रिपोर्ट के अनुसार बाद के अपडेट में भाजपा ने 63 वार्डों, जबकि कांग्रेस ने 44 वार्डों में जीत दर्ज की।

जयपुर का परिणाम भाजपा के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि राजधानी में जीत का सीधा असर राज्य की शहरी राजनीतिक धारणा पर पड़ता है।

जोधपुर में कांटे की टक्कर

जोधपुर नगर निगम में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। उपलब्ध परिणामों में दोनों दलों ने 44-44 वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि निर्दलीय उम्मीदवारों ने 11 वार्डों में जीत हासिल की। इस तरह जोधपुर में बोर्ड गठन के लिए निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई।

जोधपुर का परिणाम दोनों प्रमुख दलों के लिए प्रतिष्ठा का विषय था। ऐसे में बराबरी का परिणाम स्थानीय राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दे सकता है।

उदयपुर में भाजपा को स्पष्ट बढ़त

उदयपुर नगर निगम में भाजपा ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए बढ़त बनाई। उपलब्ध परिणामों के अनुसार भाजपा ने 80 में से 53 वार्डों में जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस को 23 सीटें मिलीं। निर्दलीय प्रत्याशियों को तीन और सीपीआई(एम) को एक सीट मिली।

उदयपुर में भाजपा की यह सफलता पार्टी के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शुरुआती परिणामों में भी भाजपा लगातार कांग्रेस से आगे रही थी।

अजमेर में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी

अजमेर नगर निगम में तस्वीर कुछ अलग रही। यहां कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए 37 वार्डों में जीत दर्ज की और सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई। भाजपा को 32 और निर्दलीय प्रत्याशियों को 11 सीटें मिलीं।

इस परिणाम ने यह स्पष्ट कर दिया कि राजस्थान के सभी शहरी क्षेत्रों में भाजपा का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा। अजमेर में कांग्रेस ने भाजपा को कड़ी चुनौती दी। हालांकि बोर्ड गठन के लिए निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।

बीकानेर में कांग्रेस का पलड़ा भारी

बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस ने भाजपा पर बढ़त बनाते हुए 80 में से 42 वार्डों में जीत दर्ज की। भाजपा को 27, निर्दलीय प्रत्याशियों को 10 और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) को एक सीट मिली।

बीकानेर का परिणाम कांग्रेस के लिए राहत भरा माना जा रहा है और इससे पार्टी को स्थानीय स्तर पर संगठन मजबूत करने का मौका मिलेगा।

भीलवाड़ा में भाजपा का स्पष्ट बहुमत

भीलवाड़ा नगर निगम में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 70 में से 45 वार्डों में जीत हासिल की। निर्दलीय प्रत्याशी 15 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जबकि कांग्रेस को 10 सीटों से संतोष करना पड़ा।

इस परिणाम से भीलवाड़ा में भाजपा की स्थिति मजबूत हुई है और बोर्ड गठन के लिए उसे अन्य दलों या निर्दलीयों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं दिखती।

कोटा में भी भाजपा आगे

कोटा नगर निगम के 100 वार्डों में से घोषित परिणामों में भाजपा ने 50 वार्डों में जीत दर्ज की। कांग्रेस को 30 और निर्दलीयों को तीन सीटें मिली थीं, जबकि शेष वार्डों के परिणाम उस समय घोषित होने बाकी थे।

कोटा में भाजपा की बढ़त को पार्टी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

भरतपुर में निर्दलीयों का दबदबा

भरतपुर नगर निगम का परिणाम अन्य बड़े शहरों से बिल्कुल अलग रहा। यहां निर्दलीय उम्मीदवारों ने सबसे शानदार प्रदर्शन किया। उपलब्ध परिणामों के अनुसार निर्दलीयों ने 65 में से 38 सीटों पर जीत दर्ज की। भाजपा को 20 और कांग्रेस को सात सीटें मिलीं।

इस परिणाम ने स्पष्ट कर दिया कि कई नगर निकायों में जनता ने प्रमुख राजनीतिक दलों के बजाय स्थानीय प्रत्याशियों को प्राथमिकता दी है। भरतपुर में बोर्ड गठन के लिए निर्दलीय पार्षद निर्णायक भूमिका में रहेंगे।

पाली में कांग्रेस आगे

पाली नगर निगम में कांग्रेस ने 29 सीटों पर जीत दर्ज कर बढ़त बनाई। भाजपा को 21 और निर्दलीय उम्मीदवारों को 11 सीटें मिलीं। यहां भी बोर्ड गठन के लिए निर्दलीय पार्षदों का समर्थन महत्वपूर्ण हो सकता है।

अलवर में भाजपा ने बाजी मारी

अलवर नगर निगम के सभी 65 वार्डों के परिणाम घोषित होने के बाद भाजपा ने 28 सीटों के साथ बढ़त बनाई। कांग्रेस को 23, निर्दलीयों को 13 और बसपा को एक सीट मिली।

हालांकि भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन निर्दलीय पार्षदों की संख्या को देखते हुए स्थानीय राजनीतिक समीकरणों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

वसुंधरा राजे के गढ़ झालावाड़ में कांग्रेस की बड़ी जीत

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के राजनीतिक प्रभाव वाले झालावाड़ में कांग्रेस ने भाजपा को बड़ा झटका दिया। उपलब्ध परिणामों के अनुसार झालावाड़ नगर परिषद में कांग्रेस ने स्पष्ट बहुमत की स्थिति बनाई, जबकि भाजपा पीछे रह गई।

यह परिणाम भाजपा के लिए इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि झालावाड़ लंबे समय से भाजपा के मजबूत राजनीतिक क्षेत्रों में गिना जाता रहा है।

निर्दलीय बने कई जगह ‘किंगमेकर’

राजस्थान निकाय चुनाव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू निर्दलीय प्रत्याशियों का प्रदर्शन रहा। कई बड़े नगर निगमों में भाजपा और कांग्रेस के बीच अंतर कम रहने के कारण निर्दलीय पार्षद बोर्ड गठन में निर्णायक भूमिका में आ गए।

भरतपुर, पाली, अजमेर, अलवर और बीकानेर जैसे निकायों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने उल्लेखनीय संख्या में जीत दर्ज की। ऐसे में दोनों प्रमुख दलों की नजर अब निर्दलीय पार्षदों पर रहेगी।

भाजपा के लिए क्यों अहम हैं ये परिणाम?

राजस्थान की सत्ता में भाजपा की सरकार है और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कार्यकाल में यह बड़ा शहरी चुनाव माना जा रहा था। इसलिए निकाय चुनावों में भाजपा का प्रदर्शन सरकार के कामकाज और संगठन की जमीनी पकड़ की परीक्षा के तौर पर भी देखा गया।

चुनाव परिणामों से भाजपा को खासतौर पर जयपुर, उदयपुर, भीलवाड़ा और कई नगरपालिकाओं में फायदा मिला है। राजनीतिक विश्लेषण में भाजपा के मजबूत संगठन और शहरी क्षेत्रों में उसकी पारंपरिक पकड़ को इसके पीछे महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है।

कांग्रेस के लिए मिश्रित परिणाम

कांग्रेस के लिए चुनाव परिणाम पूरी तरह निराशाजनक भी नहीं रहे। अजमेर, बीकानेर, पाली और कुछ अन्य निकायों में पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया। झालावाड़ में कांग्रेस की सफलता भी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण रही।

हालांकि कुल वार्डों की संख्या में भाजपा से पीछे रहना कांग्रेस के लिए चिंता का विषय है। खासकर 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को शहरी क्षेत्रों में अपना संगठन और मजबूत करने की चुनौती होगी।

2028 की राजनीति के लिए संकेत

राजस्थान निकाय चुनाव के परिणामों को 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भाजपा इन परिणामों को अपने संगठन और सरकार के प्रति जनता के समर्थन के रूप में पेश कर सकती है, जबकि कांग्रेस के सामने शहरी मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की चुनौती होगी।

कुल मिलाकर राजस्थान के निकाय चुनावों ने भाजपा को राज्य के शहरी राजनीतिक परिदृश्य में बढ़त, कांग्रेस को कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में चुनौती देने की क्षमता और निर्दलीयों को कई जगह निर्णायक ताकत के रूप में स्थापित किया है। आने वाले दिनों में विभिन्न निकायों में बोर्ड गठन, सभापति और महापौर के चुनाव के दौरान इन परिणामों के बाद बने राजनीतिक समीकरणों की असली तस्वीर सामने आएगी।

स्रोत: राज्य निर्वाचन आयोग से जुड़े आंकड़े एवं 14 सितंबर 2026 को प्रकाशित/अपडेट की गई प्रमुख समाचार रिपोर्टें।

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