विवादित भूमि पर कब्जे को लेकर आशानंदपुर में तनाव, 145 की रिपोर्ट के बावजूद दबंगों पर कार्रवाई नहीं

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विवादित भूमि पर कब्जे को लेकर आशानंदपुर में तनाव, 145 की रिपोर्ट के बावजूद दबंगों पर कार्रवाई नहीं

जौनपुर। जिले के रामपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत आशानंदपुर गांव में विवादित आबादी की जमीन पर कब्जे को लेकर तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई है। पुलिस द्वारा शांति भंग की आशंका को देखते हुए धारा 145 की रिपोर्ट भेजे जाने तथा एसडीएम न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के बावजूद दबंगों द्वारा जमीन पर कब्जा किए जाने का आरोप लगाया गया है। पीड़ित परिवार ने प्रशासन पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए किसी बड़ी घटना की आशंका जताई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार गांव निवासी महताब आलम पुत्र मुनौव्वर अली की आबादी की भूमि आराजी संख्या 1149 घ, लगभग 92×72 फीट बताई जा रही है। पीड़ित का कहना है कि उक्त भूमि पर वह लंबे समय से बिल्डिंग शटरिंग का सामान रखते आ रहे थे। आरोप है कि पड़ोसी दबंगों ने कब्जे की नीयत से वहां रखा लकड़ी एवं प्लाई का सामान रातों-रात आग लगाकर जला दिया।

घटना की सूचना पुलिस को दी गई, लेकिन पीड़ित का आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। हालांकि पुलिस ने उपजिलाधिकारी मड़ियाहूं को रिपोर्ट भेजकर मौके पर शांति भंग होने तथा गंभीर घटना की संभावना व्यक्त करते हुए बीएनएसएस की धारा 164 के तहत भूमि कुर्क किए जाने का अनुरोध किया था।

उपजिलाधिकारी द्वारा दोनों पक्षों को 5 जून 2026 को न्यायालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया। लेकिन आरोप है कि आदेश के बावजूद दबंग पक्ष ने विवादित भूमि की स्थिति बदलने के उद्देश्य से मंगलवार सुबह से ही कब्जा शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि सड़क की ओर हरा पर्दा लगाकर पीछे से निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया गया तथा दीवार खड़ी की जाने लगी।

पीड़ित ने तत्काल पीआरबी 112 को सूचना दी। आरोप है कि मौके पर पहुंची पुलिस ने कब्जा रोकने के बजाय यह कहकर वापस लौट गई कि “कब्जा कर लेने दो, आदेश आने पर बुलडोजर से गिरा दिया जाएगा।” इससे दबंगों का मनोबल और बढ़ गया और पीड़ित प्रशासनिक अधिकारियों की चौखट पर भटकता रहा।

देर शाम जब एसडीएम का आदेश थाने पहुंचा, तब थाना प्रभारी विनोद कुमार ने पुलिस बल भेजकर निर्माण कार्य रुकवाया। हालांकि इसके बावजूद मौके पर तनाव बना रहा और दबंगों द्वारा दोबारा कब्जे की कोशिश किए जाने की चर्चा है।

पीड़ित पक्ष का दावा है कि पूरी घटना वहां लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद है। यहां तक कि शटरिंग का सामान जलाते हुए भी कथित आरोपी कैमरे में दिखाई दे रहे हैं। इसके बावजूद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज न होने और कार्रवाई न किए जाने से ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की तो गांव में कभी भी बड़ी वारदात हो सकती है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है तथा प्रशासनिक स्तर पर निगरानी रखी जा रही है।

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