पूर्व जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र ने वरिष्ठ समाजसेवी सरदार सुरजीत सिंह का किया सम्मान, शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना
रिपोर्टर दीपक शुक्ला
सहारनपुर। पूर्व जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र ने सहारनपुर प्रवास के दौरान वरिष्ठ समाजसेवी एवं गुरु सिंह सभा के सक्रिय पदाधिकारी सरदार सुरजीत सिंह से उनके आवास/प्रतिष्ठान पर मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना। इस अवसर पर उन्होंने सरदार सुरजीत सिंह को अंगवस्त्र एवं अपनी पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया तथा उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की।
डॉ. दिनेश चंद्र ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली थी कि सरदार सुरजीत सिंह का स्वास्थ्य कुछ समय से ठीक नहीं है। इसी कारण वे व्यक्तिगत रूप से उनका हालचाल जानने पहुंचे। उन्होंने कहा कि सरदार सुरजीत सिंह सिख समाज के प्रमुख समाजसेवी होने के साथ-साथ गुरु सिंह सभा के अत्यंत सक्रिय सदस्य एवं पदाधिकारी रहे हैं। उन्होंने समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
उन्होंने अपने प्रशासनिक कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि उप-जिलाधिकारी, नगर मजिस्ट्रेट, अपर जिलाधिकारी और जिलाधिकारी के रूप में कार्य करते समय उन्होंने सरदार सुरजीत सिंह को सदैव सभी वर्गों के लोगों के प्रति विनम्र, संयमित और सेवा भाव रखने वाला व्यक्तित्व पाया। उन्होंने कहा कि पंजाब होटल के माध्यम से भी उन्होंने कभी केवल व्यवसायिक दृष्टिकोण नहीं अपनाया, बल्कि उसे समाज सेवा का माध्यम बनाया और सभी का सम्मान किया।
पूर्व जिलाधिकारी ने कहा कि ऐसे समाजसेवी व्यक्तित्व समाज की अमूल्य धरोहर होते हैं। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि सरदार सुरजीत सिंह को उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं निरंतर समाज का मार्गदर्शन करने की शक्ति प्रदान करें। इस दौरान उन्होंने श्रद्धाभाव से “बोले सो निहाल, सत श्री अकाल” तथा “वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह” का उद्घोष भी किया।
डॉ. दिनेश चंद्र ने कहा कि जब भी वे सहारनपुर में अपने सेवाकाल के दौरान आते थे, सरदार सुरजीत सिंह स्नेहपूर्वक उनका सम्मान करते थे। आज उन्हें अवसर मिला कि वे स्वयं एक समाजसेवी के रूप में उनका सम्मान कर सकें। इस अवसर पर उन्होंने अपनी पुस्तक भी उन्हें भेंट की तथा मानवता, समन्वय और समाज सेवा का संदेश देती प्रेरणादायी कविता का पाठ किया।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि समाज के बुजुर्गों का आशीर्वाद हम सभी के लिए अमूल्य है। जब तक ऐसे वरिष्ठजन हमारे बीच हैं, तब तक समाज को उनकी सीख, अनुभव और मार्गदर्शन मिलता रहेगा। उन्होंने सभी से बुजुर्गों का सम्मान करने तथा समाज सेवा की भावना को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।














