हरिद्वार की पावन धरती पर पूर्व जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र ने ताजा कीं पुरानी स्मृतियां

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हरिद्वार की पावन धरती पर पूर्व जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र ने ताजा कीं पुरानी स्मृतियां

मां गंगा की अविरलता, स्वच्छता और पवित्रता बनाए रखने का लिया संकल्प, युवाओं को संघर्ष से प्रेरणा लेने का दिया संदेश

रिपोर्टर : दीपक शुक्ला

हरिद्वार। संयुक्त उत्तर प्रदेश के दौर से हरिद्वार से गहरा आत्मीय और प्रशासनिक संबंध रखने वाले पूर्व जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र ने रविवार को मां गंगा के पावन तट पर पहुंचकर करीब तीन दशक पुरानी स्मृतियों को ताजा किया। हरिद्वार की धार्मिक, ऐतिहासिक और पौराणिक महत्ता का उल्लेख करते हुए उन्होंने मां गंगा की अविरल धारा, स्वच्छता और पवित्रता को नमन किया। साथ ही लोगों से गंगा को प्रदूषण से बचाने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए इसकी निर्मलता बनाए रखने का आह्वान किया।

डॉ. दिनेश चंद्र ने कहा कि हरिद्वार से उनका रिश्ता विशेष रूप से आत्मीय है। उनका संबंध जनपद बिजनौर से है और हरिद्वार से भी उनका पुराना प्रशासनिक जुड़ाव रहा है। उन्होंने बताया कि हरिद्वार क्षेत्र की भौगोलिक सीमाओं में समय-समय पर बदलाव हुए हैं। उत्तर प्रदेश के विभाजन के बाद हरिद्वार उत्तराखंड का हिस्सा बना।

उन्होंने अपनी प्रशासनिक सेवा की पुरानी यादें साझा करते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश के विभाजन से पहले करीब तीन वर्षों तक उन्हें हरिद्वार, लक्सर आदि क्षेत्रों में उपजिलाधिकारी के रूप में कार्य करने का अवसर मिला। इसी दौरान इस क्षेत्र की धरती, मां गंगा और यहां के लोगों से उनका गहरा जुड़ाव बना, जिसकी स्मृतियां आज भी उनके मन में जीवंत हैं।

आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का केंद्र है हरिद्वार

पूर्व जिलाधिकारी ने कहा कि हरिद्वार केवल धार्मिक नगर ही नहीं, बल्कि आस्था, तपस्या, साधना और सनातन संस्कृति की जीवंत भूमि है। साधु-संतों की तपस्या से पवित्र हुई इस धरती पर मां गंगा के किनारे पूजा-अर्चना और स्नान भारतीय सनातन परंपरा की प्राचीन विरासत का हिस्सा है।

उन्होंने मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण की पौराणिक कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि राजा भगीरथ की कठोर तपस्या के फलस्वरूप भगवान शिव की जटाओं से मां गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुईं। गंगा का अवतरण केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि मानव जीवन, लोककल्याण और प्रकृति संरक्षण का भी प्रतीक है।

श्यामपुर घाट पर ताजा हुईं 28 वर्ष पुरानी यादें

मां गंगा के तट स्थित श्यामपुर घाट पहुंचने पर डॉ. दिनेश चंद्र भावुक नजर आए। उन्होंने करीब 28 वर्ष पुरानी स्मृतियों को याद करते हुए बताया कि श्यामपुर क्षेत्र से उनका पुराना प्रशासनिक जुड़ाव रहा है। उन्होंने श्यामपुर थाने के अभिलेखों में डाकू सुल्ताना से संबंधित उल्लेख होने की बात भी कही।

उन्होंने बताया कि उस दौर में श्री आरपी सिंह उनके प्रथम जिलाधिकारी रहे, जबकि उनके बाद आराधना शुक्ला ने जिलाधिकारी के रूप में कार्य किया। श्यामपुर गांव में आयोजित चौपाल की स्मृतियां भी उन्होंने साझा कीं। उन्होंने कहा कि समय भले ही करीब तीन दशक आगे बढ़ गया हो, लेकिन जीवन की अच्छी और सार्थक घटनाओं की स्मृतियां हमेशा मन में जीवित रहती हैं।

बाढ़ और कटान से विकास तक बदली तस्वीर

डॉ. दिनेश चंद्र ने कहा कि पूर्व में गंगा के किनारे कटान और बाढ़ के कारण आसपास के गांवों के लोगों को बरसात के दिनों में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। बाढ़ और कटान से जनजीवन प्रभावित होता था तथा ग्रामीणों को कठिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता था।

उन्होंने कहा कि समय के साथ विकास कार्यों, तटबंधों और सुरक्षा व्यवस्थाओं में सुधार हुआ है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों के प्रयासों से बाढ़ और कटान के प्रभाव को नियंत्रित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं, जिससे क्षेत्र की स्थिति में काफी बदलाव आया है।

गंगा की स्वच्छता प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी

डॉ. दिनेश चंद्र ने मां गंगा को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि गंगा हमारी आस्था, संस्कृति और जीवन से जुड़ी जीवनदायिनी धारा है। गंगा की स्वच्छता केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

उन्होंने लोगों से अपील की कि गंगा में कूड़ा, प्लास्टिक, पूजन सामग्री अथवा ऐसी कोई वस्तु न डालें, जिससे नदी का जल और पर्यावरण प्रदूषित हो। उन्होंने कहा कि मां गंगा के प्रति हमारी आस्था तभी सार्थक होगी, जब हम उनकी स्वच्छता और पवित्रता की जिम्मेदारी भी समझेंगे।

युवाओं से कहा- बाधाओं से घबराएं नहीं

युवाओं और विद्यार्थियों को संदेश देते हुए पूर्व जिलाधिकारी ने कहा कि जीवन में कठिनाइयां और बाधाएं आना स्वाभाविक है। ऐसे समय में निराश होने के बजाय मां गंगा की अविरल धारा से प्रेरणा लेनी चाहिए। गंगा रास्ते में आने वाली बाधाओं के बावजूद अपना मार्ग बनाते हुए निरंतर आगे बढ़ती हैं। उसी प्रकार मनुष्य को भी कठिन परिस्थितियों से घबराए बिना लगातार प्रयास करते रहना चाहिए।

उन्होंने प्रसिद्ध पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा—

“लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।”

उन्होंने युवाओं से अनुशासन, सकारात्मक सोच और निरंतर प्रयास के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने का आह्वान किया।

स्वच्छ गंगा और स्वस्थ समाज का संकल्प

डॉ. दिनेश चंद्र ने कहा कि मां गंगा करोड़ों लोगों की आस्था के साथ-साथ जीवन, संस्कृति और प्रकृति से जुड़ी हुई हैं। इसलिए गंगा की निर्मलता बनाए रखना समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। सामूहिक प्रयासों से ही गंगा को स्वच्छ और निर्मल रखा जा सकता है।

हरिद्वार प्रवास के दौरान उन्होंने गंगा तट से जुड़ी विभिन्न स्मृतियों और दृश्यों को तस्वीरों के माध्यम से भी साझा किया। उन्होंने कहा कि ये तस्वीरें केवल प्राकृतिक सौंदर्य का चित्रण नहीं, बल्कि अतीत की स्मृतियों, वर्तमान की विकास यात्रा और भविष्य के प्रति हमारी जिम्मेदारी का संदेश भी देती हैं।

अंत में उन्होंने लोगों से मां गंगा की पवित्रता बनाए रखने, प्रकृति का संरक्षण करने तथा युवाओं को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “आइए, मिलकर हम सब प्रयास करें। मां गंगा से प्रेरणा लें और निरंतर आगे बढ़ें। जय हिंद, जय भारत।”

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